JSS NEWS पितृपक्ष विशेष: पितृऋण से मुक्ति की आस में शिवपुरी के ऐतिहासिक घाटों पर मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुआ पितृपक्ष महापर्व

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बाणगंगा और भदैयाकुंड के पवित्र तटों पर भोर होते ही उमड़ा आस्था का जनसैलाब

आचार्यों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से किया तर्पण, पिंडदान और जलांजलि अर्पित

संजय आजाद

शिवपुरी। ​शिवपुरी के पावन प्रांगण में आश्विन मास के साथ ही पूर्वजों के प्रति अगाध श्रद्धा, कृतज्ञता और आस्था का महापर्व पितृपक्ष पूर्ण धार्मिक निष्ठा के साथ प्रारंभ हो चुका है। शनिवार की पावन प्रभात से ही शहर के सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक बाणगंगा परिसर तथा प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण भदैयाकुंड के घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी तांता देखने को मिला। प्रातः लगभग 7 बजे से ही विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे परिवारों के आवागमन से संपूर्ण घाट क्षेत्र आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो उठा, जहाँ अपने-अपने पूर्वजों के निमित्त विशेष धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण एवं पिंडदान संपन्न कराने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। सनातन धर्म की महान मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष वह पावन समयावधि है जब वंशज अपने देवंगत पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति अपना समर्पण प्रकट करते हैं, इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए शिवपुरी के वासियों ने भोर की प्रथम किरण के साथ ही घाटों में पवित्र स्नान कर तिल, जौ, जल तथा कुशा के माध्यम से अपने पितरों को जलांजलि अर्पित की और योग्य आचार्यों एवं विद्वान पंडितों के मार्गदर्शन में वेदोक्त मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान का कर्मकांड पूरा किया। प्रात:काल से लेकर मध्याह्न तक बाणगंगा और भदैयाकुंड के तटों पर निरंतर बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से संपूर्ण वातावरण वैदिक ऋचाओं, शंखध्वनि और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान रहा।



 इस विषय पर प्रकाश डालते हुए नगर के प्रकांड विद्वान पंडित महेंद्र पाराशर शास्त्री जी (खोरघार वालों) ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष का स्थान हमारे धर्म में अत्यंत सर्वोपरि है, जिसमें व्यक्ति को अपनी पारिवारिक परंपराओं एवं पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार ही श्राद्ध, तर्पण एवं दान-पुण्य करना चाहिए, जिससे पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति, आरोग्य तथा समृद्धि का वास होता है। इस वर्ष यह पवित्र कल्प 26 सितंबर से प्रारंभ होकर आगामी 10 अक्टूबर तक चलेगा, जिसके अंतर्गत श्रद्धालु तिथिवार अपने-अपने पित्रों की शांति और सद्गति के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपादित करेंगे। चूँकि भाद्रपद पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व होता है, इसी कारण प्रथम दिवस ही बाणगंगा के ऐतिहासिक कुंड और भदैयाकुंड के प्राकृतिक झरनों के किनारे सैकड़ों परिवारों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। आगामी दो सप्ताह तक शिवपुरी के इन प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की यह भारी उपस्थिति निरंतर बने रहने की पूरी संभावना है, जहाँ लोग अपने सनातन संस्कारों का निर्वहन करते हुए पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और संपूर्ण कुल के कल्याण की मंगल कामना करेंगे।

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